
नागपंचमी पर लायन्स भोजन सेवा केन्द्र में विशेष दाल-बाटी भोजन
मरीजों के परिजनों को कराया निमाड़ी परम्परा के अनुरूप विशेष भोजन
खण्डवा। नागपंचमी के पावन अवसर पर लायन्स क्लब खण्डवा द्वारा जिला चिकित्सालय परिसर में विगत 26 वर्षों से संचालित लायन्स भोजन सेवा केन्द्र में मरीजों के परिजनों के लिए विशेष रूप से दाल-बाटी, चावल एवं कढ़ी का भोजन तैयार कर निःशुल्क परोसा गया। निमाड़ की पारम्परिक संस्कृति और पर्व की भावना को ध्यान में रखते हुए भोजन में विशेष रूप से दाल-बाटी को शामिल किया गया।
लायन्स भोजन सेवा केन्द्र के संबंध में जानकारी देते हुए नारायण बाहेती एवं समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि लायन्स क्लब खण्डवा के अध्यक्ष घनश्याम वाधवा, सचिव हेमलता पालीवाल, कोषाध्यक्ष पवन लाड़, भोजन सेवा केन्द्र के चेयरमैन गांधी प्रसाद गदले, को-चेयरमैन नारायण बाहेती एवं राजीव शर्मा के मार्गदर्शन में केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन 250 से अधिक मरीजों के परिजनों को सम्मानपूर्वक टेबल-कुर्सी पर बैठाकर निःशुल्क भोजन कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि नागपंचमी निमाड़ का प्रमुख लोकपर्व है और इस अवसर पर अधिकांश निमाड़ी परिवारों में दाल-बाटी बनाने की परम्परा है। ग्रामीण क्षेत्रों से उपचार के लिए आए मरीजों के परिजनों को यह महसूस न हो कि पर्व के दिन वे अपने घर का पारम्परिक भोजन नहीं कर पाए, इसी भावना से भोजन सेवा केन्द्र में विशेष दाल-बाटी का आयोजन किया गया। इसी प्रकार ग्यारस के दिन चावल का सेवन नहीं करने वाले लोगों के लिए चावल के स्थान पर साबूदाना अथवा थुली बनाई जाती है। विभिन्न त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर मिठाईयुक्त एवं पर्वानुकूल भोजन भी तैयार किया जाता है।
नागपंचमी के अवसर पर लियो क्लब खण्डवा के अध्यक्ष अभिषु शर्मा, सचिव शिवम जायसवाल, कोषाध्यक्ष पवन जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष सुमित परिहार, लियो पूजा अग्रवाल, समाजसेवी सुनील जैन, डिस्ट्रिक्ट पीआरओ राजीव मालवीय, गांधी प्रसाद गदले, राजीव शर्मा, घनश्याम वाधवा एवं नारायण बाहेती,मदन चौधरी ने भोजन सेवा में अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
इस अवसर पर अभिषु शर्मा ने 2 कट्टे चावल का सहयोग भी प्रदान किया। वहीं अभिषु शर्मा एवं सुमित परिहार को तिथि अनुसार जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी गई। कार्यक्रम के अंत में राजीव शर्मा ने सभी सहयोगियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
पर्व की खुशी बांटने और सेवा के माध्यम से संवेदना को साकार करने का यह प्रयास मरीजों के परिजनों के लिए विशेष रूप से सुखद एवं आत्मीय अनुभव रहा।












